बेहतर नींद
घर में नवजात शिशु के आने के बाद कैसे सोएँ

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नए माता-पिता के रूप में ज़िंदगी के इस दौर के बारे में आपको सबने आगाह किया होगा। बच्चे के आने के बाद शायद आपको नींद गँवानी ही पड़ेगी। हर चीज़ की तरह नींद को भी परिवार के नए सदस्य के हिसाब से ढालना होगा। लेकिन रुकिए, हालात को आसान बनाने के तरीक़े हैं। ये रहे कुछ:
खोई हुई नींद पूरी करें: जब भी मौक़ा मिले, सोने की कोशिश करें; दिन में या वीकेंड पर कुछ घंटे ज़्यादा। आप इतने थके होंगे कि रात में छोटे-छोटे टुकड़ों में हल्की नींद के बजाय शायद गहरी नींद पूरी कर लेंगे। अपने कमरे में अंधेरा करें या आई मास्क आज़माएँ और सो जाएँ।
कैफ़ीन कम लें: अगर लेना ही हो, तो दिन में एक से ज़्यादा कैफ़ीन वाली ड्रिंक न लें और ध्यान रखें कि शाम को या सोने के समय के क़रीब न लें। इसे सेहतमंद रखना याद रखें ताकि आप अच्छा महसूस करें।
झपकी लें: जब बच्चा सो रहा हो, तो माँ को भी घर के काम निपटाने के बजाय झपकी ले लेनी चाहिए। कम से कम 20 मिनट की झपकी लेने की कोशिश करें। इससे आप तरोताज़ा होंगे और आधी नींद वाली सुस्ती या स्लीप इनर्शिया भी नहीं होगी। लेकिन दोपहर 3 बजे से पहले सोने की कोशिश करें, वरना यह आपके रात के सोने के समय में बाधा डाल सकता है। अगर आपके बच्चे की झपकी का कोई तय समय नहीं है, तो रिश्तेदारों और दोस्तों की मदद लें। जब आप झपकी लें, तो अपनी माँ को बच्चे का ध्यान रखने दें।
रात की ड्यूटी बाँटें: अगर आप पूरे दिन दूध पिलाती रहेंगी, तो आपको नींद की कमी झेलनी पड़ेगी। अगर आप स्तनपान कराती हैं, तो दूध पंप करने के बारे में सोचें ताकि पिता कम से कम रात की एक फ़ीडिंग संभाल सकें। इस तरह, दोनों की नींद टूटने के बजाय कम से कम एक व्यक्ति को रात की अच्छी नींद मिलेगी।
बच्चे को दोबारा सोना सिखाएँ: रात में बच्चे के कुनमुनाने या कराहने पर आपको फ़ौरन बिस्तर से उछलने की ज़रूरत नहीं है। ज़्यादातर बच्चे 6 महीने तक एक बार में आठ घंटे तक सोने लायक़ हो जाते हैं। उसे जागते हुए ही बिस्तर पर लिटाएँ, ताकि बच्चा आधी रात में ख़ुद दोबारा सोना सीखे। जब वह जागेगी, तो उसे सुलाने के लिए आप जो भी तरीक़े अपनाती रही हैं (जैसे झुलाना या दूध पिलाना), वह उन्हीं पर निर्भर करेगी।
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