खान-पान और सेहत
क्या हवा की क्वालिटी हमारी नींद पर असर डालती है

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आपके शहर पर छाई वह धुंध ज़्यादातर प्रदूषण का ख़तरनाक रूप से ऊँचा स्तर है, जो वहाँ रहने वाले सभी लोगों की सेहत के लिए ख़तरा है। वजह चाहे जो भी हो- औद्योगिक धुआँ, बढ़ता ट्रैफ़िक या जीवाश्म ईंधन, यह हमारी हर तरक़्क़ी को ख़तरे में डाल रहा है। WHO के अनुसार, वायु प्रदूषण भारत में मौत का पाँचवाँ सबसे बड़ा कारण है।
ख़ासकर सर्दियों में हवा में भरे ज़हरीले प्रदूषक कुल मिलाकर सेहत के लिए ख़तरनाक हैं। दरअसल बच्चे और बुज़ुर्ग सबसे ज़्यादा संवेदनशील होते हैं और बिगड़ते पर्यावरण की वजह से फेफड़ों की गंभीर समस्याओं के शिकार हो सकते हैं।
रिसर्च से पता चला है कि प्रदूषित हवा के लगातार संपर्क में रहने से नींद में ख़लल पड़ सकता है। इसमें हैरानी की बात नहीं, क्योंकि ख़राब हवा ऊपरी श्वसन तंत्र में जाकर जलन पैदा करती है और साँस लेना उतना ही मुश्किल बना देती है। हमारे फेफड़े श्वसन तंत्र के मुख्य अंग हैं। श्वसन तंत्र के दूसरे अंग हवा को फेफड़ों तक पहुँचाते हैं, जैसे ट्रेकिया (श्वास नली), जो आगे ब्रोंकाई नामक छोटी संरचनाओं में बँट जाती है, जिनके ज़रिए हवा श्वसन मार्ग से होकर फेफड़ों में जाती है। पूरी प्रक्रिया मुश्किल हो जाती है, और जिनके फेफड़े कमज़ोर हैं या जिनके अंग अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुए हैं, उन्हें और ज़्यादा परेशानी होती है और प्रदूषण बढ़ते ही उनकी रातें बेचैन होने लगती हैं।
ख़राब हवा से निपटने और बेहतर नींद के लिए आप क्या कर सकते हैं-
- बाहरी हवा के संपर्क में कम आएँ। सुबह-सुबह या रात में बाहर निकलने से बचें, जब प्रदूषण सबसे ज़्यादा होता है। दिन के ज़्यादातर समय अपनी खिड़कियाँ बंद रखने की कोशिश करें,
- अगर साँस लेने में तकलीफ़ हो, तो इनहेलर ले सकते हैं। यह अब सिर्फ़ अस्थमा के मरीज़ों के लिए नहीं है। यह लगातार खाँसी, घरघराहट, सीने में जकड़न या फेफड़ों में किसी भी परेशानी से राहत देता है। बीटा एगोनिस्ट फेफड़ों की ब्रोंकियल मांसपेशियों को आराम देता है, वायुमार्ग खोलता है और ज़्यादा ऑक्सीजन अंदर जाने देता है। आप सोने से पहले इनहेलेशन आज़मा सकते हैं।
- एयर प्यूरीफ़ायर लें या अपने घर के आसपास ज़्यादा हरियाली लगाएँ, और इससे निपटने के लिए इनडोर पौधे भी रखें।
- अपने शरीर को साफ़ करने के लिए दिन में कम से कम दो बार अदरक, तुलसी और हल्दी की एंटी-इन्फ़्लेमेटरी ड्रिंक पिएँ।
- इम्यूनिटी बढ़ाने और उस सारे स्मॉग के बुरे असर से लड़ने के लिए विटामिन C अच्छी मात्रा में लें। ओज़ोन वायु प्रदूषण के साथ बहुत सारे टॉक्सिन्स आते हैं। डिटॉक्स रहें।
- कुछ साँस की कसरतें करें। अपने फेफड़ों को राहत देने के लिए कुछ योग से बेहतर कुछ नहीं। भस्त्रिका प्राणायाम सबसे असरदार है। साँस की यह असरदार कसरत शरीर के सिस्टम को डिटॉक्स (डिटॉक्सिफ़िकेशन) करने में मदद करती है और ऊर्जा बनाए रखती है। इसे करने का तरीक़ा:
- पद्मासन या लोटस पोज़ में बैठें, और साँस लेते समय पेट को पूरी तरह फैलने दें।
- पाँच तक गिनने के बाद साँस छोड़ें। अब ज़ोर से साँस अंदर लें और बाहर छोड़ें
- ध्यान रखें कि साँस डायफ़्राम से बाहर निकल रही हो; गर्दन, सिर, छाती और कंधे स्थिर रखें जबकि पेट अंदर और बाहर हो। अगर आप सबसे अच्छी नींद का अनुभव चाहते हैं, तो देखें भारत का बेस्ट मैट्रेस ब्रांड।
General information, not medical advice. If poor sleep goes on for weeks, please see a doctor.
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