खान-पान और सेहत
गर्मियों से जुड़े सेहत के ख़तरों से कैसे निपटें

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हर मौसम के साथ सेहत के कुछ ख़तरे जुड़े होते हैं। हर तरह के संक्रमण से बचने के लिए हमें समझदारी से ज़रूरी सावधानियाँ बरतनी चाहिए। आख़िर पछताने से बेहतर है सावधान रहना। फिर भी, कभी-कभी हम सब कुदरत के कहर के आगे हार जाते हैं और अपने आरामदायक बेड पर पड़े रहते हैं। इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि हर स्थिति में ख़ुद को कैसे बचाएँ।
यह रही इस मौसम के संभावित स्वास्थ्य ख़तरों से बचाव के उपायों और ज़रूरत पड़ने पर ज़रूरी समाधानों की आपकी गाइड।
हीट स्ट्रोक (लू लगना)
हाइपरथर्मिया का एक गंभीर रूप हीट स्ट्रोक कहलाता है। यह तब होता है जब इंसानी शरीर जितनी गर्मी निकाल सकता है उससे ज़्यादा गर्मी सोख लेता है। बहुत ज़्यादा तापमान में शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला तंत्र विफल हो जाता है, और इस स्थिति में बुख़ार और यहाँ तक कि बेहोशी भी हो सकती है।
समाधान: शरीर का तापमान कम करने के लिए ख़ुद को बर्फ़ में डुबोएँ, या ठंडे पानी से नहाएँ। गर्मियों में ख़ूब पानी पीकर, हल्के और ढीले कपड़े पहनकर, और ख़ुद पर ज़्यादा ज़ोर न डालकर हीट स्ट्रोक से बचा जा सकता है।
घमौरियाँ
जिन लोगों को सनबर्न का सबसे ज़्यादा ख़तरा होता है, वे घमौरियों के भी सबसे ज़्यादा शिकार होते हैं, जो तब होती हैं जब गर्मी त्वचा में जलन पैदा करती है, ख़ासकर शरीर की सिलवटों के आस-पास।
समाधान: अतिरिक्त नमी सोखने के लिए बार-बार कूलिंग पाउडर लगाएँ, बार-बार नहाएँ और जितना हो सके गर्मी से बचें। कैलामाइन लोशन या हाइड्रोकार्टिसोन क्रीम से खुजली और जलन में राहत मिल सकती है।
हीट एग्ज़ॉस्चन (गर्मी से थकावट)
शरीर के ज़्यादा गर्म होने से तेज़ नब्ज़ और बहुत पसीना आना हीट एग्ज़ॉस्चन के कुछ लक्षण हैं। गर्मी से जुड़े तीन सिंड्रोम में हीट स्ट्रोक सबसे गंभीर और हीट क्रैंप्स सबसे हल्का है।
समाधान: पर्याप्त आराम करें। ठंडे पानी से नहाएँ, स्पंज बाथ लें या शॉवर लें, और कोई भी ठंडा बिना शराब वाला पेय पिएँ। हल्के कपड़े पहनें। आराम करें और अगर जी मिचलाना जारी रहे तो डॉक्टर को दिखाएँ।
डिहाइड्रेशन (पानी की कमी)
डिहाइड्रेशन के लक्षण हैं मांसपेशियों में ऐंठन, सिर हल्का लगना, दिल की धड़कन तेज़ होना, आँखों और मुँह का सूखना, त्वचा का सूखना (जिसमें पसीना लगभग बंद हो जाता है), और जी मिचलाना।
समाधान: नींबू पानी, नारियल पानी, या इलेक्ट्रोलाइट्स वाले किसी दूसरे पेय से शरीर में पानी की कमी पूरी करें। ख़ूब तरल पदार्थ लेना और आराम करना ज़रूरी है।
फ़ूड पॉयज़निंग
यह वह समय है जब बाहर खाने को लेकर आपको बहुत सावधान रहना चाहिए। गर्म मौसम में बैक्टीरिया तेज़ी से बढ़ सकते हैं। ये बैक्टीरिया ख़तरनाक टॉक्सिन्स बना सकते हैं जो आपको बीमार कर देंगे। बैक्टीरिया को न नंगी आँखों से देखा जा सकता है, न सूँघा जा सकता है और न ही उनका स्वाद पता चलता है। जानवरों से बने उत्पाद, डेयरी और डेयरी वाली सभी चीज़ें 40 डिग्री F से नीचे रखनी चाहिए। फ़ूड पॉयज़निंग से बचने के लिए, ऐसा सारा खाना फेंक दें जो दो घंटे से ज़्यादा समय तक फ़्रिज से बाहर रहा हो, ख़ासकर अगर धूप में रहा हो। गलती से खाए गए बैक्टीरिया का असर कम करने के लिए अपनी इम्यूनिटी बढ़ाना और पाचन मज़बूत रखना भी सलाह के योग्य है।
समाधान: कुछ घंटों तक खाना-पीना बंद कर दें। आमतौर पर कहा जाता है कि फ़ूड पॉयज़निंग 48 घंटों में ठीक हो जाती है। साफ़ सोडा, साफ़ शोरबा या पेपरमिंट टी पीकर देखें। सूप में एक टेबलस्पून कुचला हुआ जीरा डालें। आप घर पर अमृतधारा नाम का आयुर्वेदिक उपाय भी रख सकते हैं।
सनबर्न
जब आप लंबे समय तक सीधी धूप में रहते हैं, तो अल्ट्रावायलेट रेडिएशन त्वचा को जला देता है। सनबर्न के लक्षण हैं काली पड़ी त्वचा के धब्बों का छिलना।
समाधान: सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक, जब धूप सबसे तेज़ होती है, घर के अंदर रहने की कोशिश करें। टाइटेनियम डाइऑक्साइड और ज़िंक ऑक्साइड वाले सनस्क्रीन इस्तेमाल करके सनबर्न से बचें, जो फिज़िकल बैरियर वाले सनस्क्रीन हैं और UVA व UVB दोनों किरणों से बचाते हैं।
पैरों का संक्रमण
गर्मियों में पसीना और नमी आपके पैरों में संक्रमण की संभावना बढ़ा सकते हैं।
समाधान: मेडिकल स्टोर से आप एंटी-बैक्टीरियल पाउडर ख़रीद सकते हैं। बैक्टीरिया से छुटकारा पाने के लिए अपनी उँगलियों और पैरों को अच्छी तरह रगड़कर साफ़ करें। गंभीर त्वचा रोगों के लिए त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें।General information, not medical advice. If poor sleep goes on for weeks, please see a doctor.
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