नींद का विज्ञान
बारिश में हमें नींद क्यों आती है?

इस लेख में
बारिश में आपको नींद क्यों आती है?
जी हाँ, यह सच है कि बारिश के मौसम में हमें ज़्यादा नींद आती है। हम ज़्यादा सोच में डूबे रहते हैं और आम दिनों से ज़्यादा थकान महसूस करते हैं।
आसमान में बादल छाए रहने और धूप कम होने से हमारा मेलाटोनिन स्राव भी घट जाता है, जिससे हमारा शरीर दिन और रात के चक्र, या वैज्ञानिक भाषा में सर्केडियन रिदम, को लेकर उलझ जाता है। इससे हमें दिन भर ज़्यादा नींद आती है। जब धूप कम होती है, तो शरीर कम सेरोटोनिन बनाता है, जिससे लोग आसानी से उदास, आलसी और हतोत्साहित महसूस करते हैं। सेरोटोनिन भावनाओं, भूख और मोटर फ़ंक्शन्स में अहम भूमिका निभाता पाया गया है। सेरोटोनिन स्वाभाविक रूप से मूड को स्थिर कर सकता है। यह खाने, पचाने और सोने से जुड़ा केमिकल है। यह डिप्रेशन कम करने, चिंता को नियंत्रित करने, घाव भरने और हड्डियों की सेहत बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार है।
तो कोई हैरानी नहीं कि दुनिया में सबसे ज़्यादा आत्महत्याएँ भी सबसे कम धूप वाले देशों में होती हैं। World Health Organization (WHO) के अनुसार, यूरोप दुनिया में सबसे ज़्यादा आत्महत्या वाला क्षेत्र है और इस श्रेणी में आने वाले इलाक़े वे देश हैं जहाँ अक्सर बादल छाए रहते हैं। इसी से यह कहावत समझ आती है “आसमान धुंधला और बादलों से घिरा था”। मौसम का हमारे मूड और नींद की गुणवत्ता से सीधा संबंध हो सकता है।
ये रहे तरीक़े जिनसे आप ख़ुद को प्रेरित रख सकते हैं और
नींद के एहसास से लड़ सकते हैं।
ज़्यादा या कम सोने से बचें: एक दिनचर्या बनाएँ, पक्का करें कि आप इन दोनों में से किसी का शिकार न बनें। अपनी सामान्य नींद पाने के लिए योग या कोई आरामदायक गतिविधि करें। ज़्यादा या बहुत कम सोने से आप थका हुआ महसूस कर सकते हैं और आपकी इम्यूनिटी कम हो सकती है। पक्का करें कि आप अच्छी नींद लेते रहें।
रात का खाना भारी न खाएँ : अपना सिस्टम हल्का रखें क्योंकि मानसून में आपका शरीर सुस्त हो जाता है। आपका मेटाबॉलिक रेट भी धीमा हो जाता है और इसलिए पाचन अपेक्षाकृत कठिन होता है, इसलिए हल्के पेट सोने की सलाह दी जाती है।
कपड़े और चादरें अक्सर बदलें: ज़्यादा नमी में एलर्जी और बैक्टीरिया का डर रहता है। अपना तकिये का कवर और बेडशीट काफ़ी बार बदलें। नम मौसम में कपड़े बैक्टीरिया के पनपने की जगह बन जाते हैं; आप एंटी-इन्फ़ेक्टेंट डिटर्जेंट डालने के बारे में भी सोच सकते हैं।
शरीर में पानी की कमी न होने दें: शरीर में नमक का स्तर घटने से जोड़ों में दर्द और ऐंठन होती है, जिससे नींद बिगड़ती है। पसीने में खो रहे नमक की भरपाई के लिए ख़ूब पानी पिएँ और विटामिन B व एनर्जी ड्रिंक्स लें।
कसरत करें: स्वाभाविक पसीने के बावजूद, शरीर की सुस्ती दूर करने के लिए हमें कसरत करनी चाहिए। यह मौसम के साथ आने वाले सभी संक्रमणों को दूर रखने में भी मदद करती है। मानसून में धूप की कमी के बावजूद यह हमें आसानी से और गहरी नींद लेने में भी मदद करती है। रात में बेहतर नींद के लिए हमारा किफ़ायती मैट्रेस इस्तेमाल करना शुरू करें।
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